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Team Khulasa

मुजफ्फरपुर: गरीब की जिंदगी का बड़ा सच, जीवित रहे तो रोटी की चिंता और मरने पर कफन की चिंता। एक एेसी ही हृदयविदारक घटना मुजफ्फरपुर के सड़क पर देखने को मिली, जहां एक वृद्ध के शव को कफन के लिए 8 घंटे का इंतजार करना पड़ा और उसके बाद दाह संस्कार के पैसे नहीं होनेे की वजह से उसे दफना दिया गया।
घटना मुजफ्फरपुर के मझौली पंचायत के भुसाही चौक स्थित महादलित टोले की है, जहां एक 64 वर्षीय दिव्यांग भोला मांझी की रविवार की देर रात मौत हो गई थी। मृत वृद्ध के लिए ग्रामीणों ने चंदा कर 750 रुपए जुटाए। इसमें कफन तो मिला पर दाह-संस्कार के लिए लकड़ी के पैसे नहीं बचे। ऐसे में लाचार परिजनों ने वृद्ध को दफना दिया।
जीवित रहने तक बैसाखी के सहारे किसी तरह वे परिवार के लिए रोटी का जुगाड़ करते रहे। लेकिन, मौत के बाद अत्यंत गरीबी से जूझ रहे परिवार के पास कफन तक के पैसे नहीं थे। दरवाजे पर शव पड़ा था और परिजनों को दाह-संस्कार की चिंता सता रही थी।
पंचायत से भी तत्काल सहायता नहीं मिली तो गांव के सौखी मांझी, उमेश मांझी, रंजीत राम समेत कई अन्य ग्रामीणों ने चंदा कर 750 रुपये जुटाए। ये रुपये कफन व अन्य सामान की खरीदारी पर खर्च हो गए। दाह-संस्कार के लिए लकड़ी के पैसों का फिर भी उपाय नहीं हो सका। ऐसे में 8 घंटे बाद शव उठा भी तो परिवार वालों ने उसे दफना देना ही मुनासिब समझा।

बीडीओ बोले- पंचायत को दी जा चुकी है कबीर अंत्येष्टि की राशि
बीडीओ सिद्धार्थ कुमार का कहना है कि ऐसे मामले में पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता के तौर पर ग्राम पंचायत द्वारा कबीर अंत्येष्टि योजना से राशि देने का प्रावधान है। इस योजना की राशि पंचायतों को उपलब्ध कराई जा चुकी है।
लेकिन, मुखिया पति रामअगार राय का कहना है कि वर्तमान मुखिया के कार्यकाल में कबीर अंत्येष्टि की राशि उनकी पंचायत को नहीं दी गई है। जब भी किसी गरीब की मौत होती है तो वे निजी तौर पर आर्थिक मदद देते हैं।
इधर, विधायक बेबी कुमारी ने बताया कि फिलहाल वे बाहर हैं। मृतक के परिजनों को सरकारी योजना से लाभ दिलाएंगे। अगर कबीर अंत्येष्टि योजना का लाभ परिवार को नहीं दिया गया है तो इसकी जांच कराई जाएगी।